चैतुरगढ़ - छत्तीसगढ़ पर्यटन स्थल

चैतुरगढ़ ( लाफागढ़ ) कोरबा शहर से करीब 70 किलोमीटर और बिलासपुर - कोरबा मार्ग पर स्थित पाली से 25 किलोमीटर उत्तर की ओर 3060 मीटर की ऊंचाई पर पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित है | यह छत्तीसगढ़ के प्रमुख ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में से एक है और इसे छत्तीसगढ़ का कश्मीर भी कहा जाता है। यह क्षेत्र अनुपम अलौकिक और प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर एक दुर्गम स्थान है।

यह राजा पृथ्वीदेव प्रथम द्वारा बनाया गया था | पुरातत्वविदों ने इसे मजबूत प्राकृतिक किलो में शामिल किया है, क्योकि यह चारों ओर से मजबूत प्राकृतिक दीवारों से संरक्षित है केवल कुछ स्थानों पर उच्च दीवारों का निर्माण किया गया है।

यहाँ लोग महिषासुर मर्दिनी मन्दिर के दर्शन के लिए भी आते है, नवरात्रि के समय यहाँ विशेष पूजा आयोजित की जाती है।


 

इतिहास -

पुरातत्वविद  इसे सबसे मजबूत प्राकृतिक किलों में से एक मानते हैं।  केंद्रीय प्रांत और बरार में शिलालेखों की एक वर्णनात्मक सूची - कलचुरी युग 933 (1181-82 CE) में कलचुरी की एक लंबी वंशावली सूची देता है। राजाओं। इसमें उल्लेख है कि हैहय के परिवार में एक राजा था जिसके अठारह पुत्र थे। उनमें से एक कलिंग था जिसका बेटा कमला तुममाना पर शासन करता था। कमला को रत्नाराज प्रथम और बाद में पृथ्वीदेव प्रथम द्वारा मुगल सम्राट अकबर ने 1571 में किले पर कब्जा कर लिया और मुगलों ने 1628 ईस्वी तक शासन किया।  चैतुरगढ़ का निर्माण राजा पृथ्वीदेव प्रथम ने किया था।

 

भूगोल -

यह चारों ओर से मजबूत प्राकृतिक दीवारों से संरक्षित है केवल कुछ स्थानों पर उच्च दीवारों का निर्माण किया गया है। किले के तीन मुख्य प्रवेश द्वार हैं जो मेनका, हुमकारा और सिम्हाद्वार नाम से जाना जाता है।

पहाड़ी के शीर्ष पर 5 वर्ग मीटर का एक समतल क्षेत्र है, जहां पांच तालाब हैं इनमें से तीन तालाब में पानी भरा है। यहां प्रसिद्ध महिषासुर मर्दिनी मंदिर स्थित है। महिषासुर मर्दिनी की मूर्ति, 12 हाथों की मूर्ति, गर्भगृह में स्थापित होती है। मंदिर से 3 किमी दूर शंकर की गुफा स्थित है। यह गुफा जो एक सुरंग की तरह है और करीब 25 फीट लंबा है।

चित्तौड़गढ़ की पहाड़ी अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध हैं और यह रोमांचक का अनुभव प्रदान करती है। कई प्रकार के जंगली जानवर और पक्षी यहां पाए जाते हैं। एसईसीएल ने यहां देखने आने वाले पर्यटनो के लिए एक आराम घर का निर्माण किया है और मंदिर के ट्रस्ट ने पर्यटकों के लिए कुछ कमरे भी बनाये।

पहाड़ी की चोटी पर लगभग 5 वर्ग किलोमीटर (1.9 वर्ग मील) का एक मैदानी क्षेत्र है जहाँ पाँच तालाब हैं। इनमें से तीन तालाबों में साल भर पानी रहता है। कई प्रकार के जंगली जानवर और पक्षी यहाँ पाए जाते हैं।

चैतुरगढ़ का क्षेत्र अलौकिक गुप्त गुफ़ा, झरना, नदी, जलाशय, दिव्य जड़ी-बूटी तथा औषधीय वृक्षों से परिपूर्ण है। ग्रीष्म ऋतु में भी यहाँ का तापमान 30 डिग्री सेन्टीग्रेट से अधिक नहीं होता। इसीलिए इसे 'छत्तीसगढ़ का कश्मीर' कहा जाता है। अनुपम छटाओं से युक्त यह क्षेत्र अत्यन्त दुर्गम भी है |

शंकर गुफा मंदिर से 3 किलोमीटर (1.9 मील) दूर स्थित है। सुरंग की तरह गुफ़ा 25 फीट (7.6 मीटर) लंबी है। कोई भी गुफा से अंदर जा सकता है, क्योंकि वह बहुत छोटा है।

 

अन्य जानकारी -

चैतुरगढ़ का क्षेत्र अलौकिक होने के साथ ही काफ़ी दुर्गम भी है। गुप्त गुफ़ा, झरना, नदी, जलाशय, दिव्य जड़ी-बूटी तथा औषधीय वृक्षों से यह क्षेत्र परिपूर्ण है।

चैतुरगढ़ छत्तीसगढ़ के प्रमुख ऐतिहासिक पर्यटन स्थलों में से एक है। यह क्षेत्र अनुपम, अलौकिक और प्राकृतिक दृश्यों से भरपूर एक दुर्गम स्थान है। बिलासपुर-कोरबा मार्ग पर 50 किलोमीटर दूर ऐतिहासिक जगह पाली है, जहाँ से लगभग 125 किलोमीटर की दूरी पर लाफा है। लाफा से चैतुरगढ़ 30 किलोमीटर दूर ऊँचाई पर स्थित है। चैतुरगढ़ को "छत्तीसगढ़ का कश्मीर" भी कहा जाता है।

 

अन्य पर्यटन स्थल - 

आदिशक्ति माता महिषासुर मर्दिनी मंदिर

शंकर खोल गुफ़ा

चामादहरा

तिनधारी

श्रृंगी झरना

 

पहुच मार्ग -

हवाई मार्ग  - स्वामी विवेकानन्द अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा रायपुर से 200 किमी. |

 

ट्रेन मार्ग - कोरबा रेलवे स्टेशन से 50 किमी एवं बिलासपुर रेलवे स्टेशन से 55 किमी की दुरी पर स्थित है

 

सड़क मार्ग - कोरबा बस स्टैंड से 50 किमी की एवं बिलासपुर स स्टैंड से 55 किमी की दुरी पर स्थित है |


हमारी राय -

यहाँ जगह प्राक्रतिक पहाडियों से घिरा हुआ है जो की खाफी खुबसूरत लगता हैयहाँ आने के बाद आपको दुनिया निचे नजर आयेगी मतलब यहाँ की उचाई में पहोचने के बाद आपको कुछ नयी - नयी दृश्य देखने के मौका मिलेगा |






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