कौन हैं Usha Barle? Usha Barle biography
छत्तीसगढ़ के भिलाई की रहने वाली उषा बारले आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। पंडवानी गायन की दुनिया में उन्होंने एक अलग मुकाम हासिल किया है। हाल ही में उन्हें देश के प्रतिष्ठित सम्मान Padma Shri से नवाजा गया, जिससे पूरे छत्तीसगढ़ का नाम रोशन हुआ।
बचपन में झेला भारी संघर्ष: उषा बारले का बचपन आसान नहीं था। उनके पिता को उनका गाना-बजाना बिल्कुल पसंद नहीं था। एक बार गुस्से में उन्होंने Padma Shri Usha Barle को कुएं में तक फेंक दिया।
लेकिन यह घटना भी उनकी जिद और जुनून को नहीं तोड़ सकी।
7 साल की उम्र में शुरू हुआ पंडवानी सफर: Pandwani singer Chhattisgarh उषा बारले के जीवन में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब उनके फूफा और गुरु Mehattar Das Baghel ने उनकी प्रतिभा को पहचाना। सिर्फ 7 साल की उम्र से ही उन्होंने पंडवानी गाना शुरू कर दिया। बचपन में वे मोहल्ले के बच्चों के साथ खेलते-खेलते लकड़ी को चिकारा मानकर पंडवानी गाया करती थीं।
जाने जिन्होंने पद्वानी को इतनी उचाई तक पहुचाया उनकी कहानी…
गुरु के साथ ही मिला जीवनसाथी: गुरु महेत्तर दास बघेल ने कई बच्चों को पंडवानी सिखाया, जिनमें उषा के साथ उनके भविष्य के पति Amardas Barle भी शामिल थे।
यहीं से उनका व्यक्तिगत और कलात्मक जीवन एक साथ आगे बढ़ा।
12 से अधिक देशों में बिखेरा पंडवानी का जादू: आज उषा बारले 12 से अधिक देशों में अपनी पंडवानी प्रस्तुति दे चुकी हैं।
उन्होंने छत्तीसगढ़ की लोककला को अंतरराष्ट्रीय मंच तक पहुंचाया है। यही कारण है की Usha Barle story बेहद ही प्रेरणा दाय है
पद्मश्री से सम्मानित: उनकी इसी अद्भुत Chhattisgarh folk artist यात्रा और योगदान के लिए उन्हें Padma Shri से सम्मानित किया गया—जो हर कलाकार के लिए गर्व की बात होती है।