Dalha Pahad Akaltara Chhattisgarh: 2026 दल्हा या दलहा पहाड़ छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले की अकलतरा तहसील के दलहापोड़ी गांव में स्थित एक प्रमुख धार्मिक और प्राकृतिक स्थल है। यह पहाड़ धार्मिक आस्था, प्राकृतिक सुंदरता और सांस्कृतिक महत्व के कारण पूरे राज्य में प्रसिद्ध है। विशेष रूप से नागपंचमी और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है।
नागपंचमी पर दलहा पहाड़: नागपंचमी के दिन दलहा पहाड़ का महत्व सबसे अधिक माना जाता है। इस दिन हजारों श्रद्धालु पर्वत, जंगल और पत्थरीले रास्तों से पैदल लगभग 4 किलोमीटर की चढ़ाई करके सूर्यकुंड तक पहुंचते हैं। और यही दल्हा पहाड़ जाने का सही समाय है बाकी दिन यह इलाका बहुत ज्यादा सुना होता है, और आपको पहाड़ की चढ़ाई करने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता हैI
दलहा पहाड़ की प्राकृतिक सुंदरता और रहस्य: यह पहाड़ भूगर्भिक क्रिया से निर्मित माना जाता है और इसकी चट्टानों में चूना पत्थर प्रचुर मात्रा में पाया जाता है।
यहां कुल 10 कुंड बताए जाते हैं, जिनमें से केवल 8 कुंडों का पता चल पाया है।
पहाड़ में दो तालाब थे, लेकिन वर्तमान में केवल एक ही दिखाई देता है।
एक रहस्यमयी मंदिर भी यहां स्थित है, जहां पहुंचना कठिन है।
दलहा पहाड़ का धार्मिक महत्व: दलहा पहाड़ की ऊंचाई लगभग 700 मीटर मानी जाती है। यहां कई धार्मिक स्थल स्थित हैं,
सूर्यकुंड- नागपंचमी पर पूजनीय, जल ग्रहण के लिए प्रसिद्ध
पवन कुंड- हमेशा पानी से भरा रहता है, पीने योग्य
मुनि आश्रम- गुरु घासीदास के अंतिम उपदेश स्थल
अर्धनारीश्वर मंदिर- पहाड़ी पर स्थित प्रमुख मंदिर
नाग-नागिन मंदिर- नाग पूजा और आस्था का केंद्र
स्नान और जल ग्रहण – सूर्यकुंड में स्नान और पानी पीना अत्यंत शुभ माना जाता है।
मेला – नागपंचमी के अवसर पर यहां विशेष मेला लगता है।
अघ्न शुक्ल – इस दिन हवन और झंडा फहराने का आयोजन होता है।
लंगूर की कहानी – माना जाता है कि बाबा के बुलाने पर लंगूर उनके पास आ जाते हैं।
अन्य मंदिर: अर्धनारीश्वर मंदिर, श्री सिद्ध मुनि आश्रम, नाग-नागिन मंदिर, और श्री कृष्ण मंदिर।
स्थानीय मान्यता है कि सूर्यकुंड का जल पीने से स्वास्थ्य बेहतर रहता है और कई प्रकार की बीमारियां दूर होती हैं।
दलहा पहाड़ कैसे पहुंचे:
सड़क मार्ग- जांजगीर से लगभग 30 किलोमीटर की दूरी, पक्की सड़क उपलब्ध।
रेल मार्ग- नजदीकी रेलवे स्टेशन – अकलतरा रेलवे स्टेशन, 20 किलोमीटर दूर।
हवाई मार्ग- नजदीकी हवाई अड्डा – बिलासपुर हवाई अड्डा, लगभग 50 किलोमीटर।
हमारी राय: यदि आप पहाड़ों के शौकीन हैं और प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेना पसंद करते हैं, तो दलहा पहाड़ आपके लिए बेहतरीन विकल्प है।
ऊंचाई और प्राकृतिक दृश्य अद्भुत हैं।
धार्मिक आस्था और मेलों का अनुभव विशेष है।
नागपंचमी और महाशिवरात्रि के अवसर पर आने से आध्यात्मिक अनुभव और भी गहरा हो जाता है।
हालांकि, चोटी तक पहुंचने का रास्ता कठिन है, लेकिन वहां पहुंचने के बाद जो दृश्य दिखाई देता है, वह आपके सफर को यादगार बना देता है।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल):
Q1: दलहा पहाड़ की ऊंचाई कितनी है?
A: लगभग 700 मीटर।
Q2: नागपंचमी के दिन यहां क्या खास होता है?
A: सूर्यकुंड का जल ग्रहण, मेला, हवन और श्रद्धालुओं की भारी भीड़।
Q3: दलहा पहाड़ में कितने कुंड हैं?
A: कुल 10 कुंड बताए जाते हैं, जिनमें से 8 कुंड अभी तक खोजे गए हैं।
Q4: यहां कैसे पहुंचा जा सकता है?
A: सड़क, रेल और हवाई मार्ग से। जांजगीर से सड़क मार्ग से 30 किमी।