छत्तीसगढ़ में एक गांव ऐसा भी : लोगों ने खुद किया शराबबंदी का फैसला,बेचने या खरीदने पर 51 हजार का जुर्माना, CCTV से होगी निगरानी, A village like this in Chhattisgarh

Balod Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ में भले ही शराबबंदी नहीं हुई, लेकिन अब प्रदेश की जनता ने इसके लिए खुद से प्रयास करना शुरू कर दिया है। बालोद में एक गांव ने अब खुद से ही शराबबंदी करने का फैसला कर लिया है। इसके लिए कठोर नियम बनाए गए हैं। जिसके मुताबिक गांव का कोई शख्स यदि शराब बेचते या खरीदते हुए पकड़ा गया तो उससे 51 हजार रुपए जुर्माना लिया जाएगा। इसके अलावा हाईटेक तरीके से गांव के लोगों की निगरानी की जाएगी। मामला जिले के घुमका गांव का है।

3 हजार की आबादी वाले घुमका गांव में पिछले कई दिनों से अवैध शराब बिकने के मामले सामने आ रहे थे। कई लोगों को पुलिस ने जेल भेजा था। गांव के चौक-चौराहों पर कुछ लोग शराब पीकर महिलाओं को परेशान कर रहे थे। जिसके चलते ग्रामीण परेशान थे। यही वजह है कि लोगों ने गुरुवार को एक बैठक कर कुछ जरूरी फैसले लिए हैं। जो की चर्चा का विषय बन गया है। इस बैठक में पूरे गांव के लोगों को बुलाया गया था। जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुईं थीं।

45 हजार वसूले गए, 10 दिन के अंदर लगेंगे सीसीटीवी कैमरे: बैठक में ये फैसला लिया गया कि यदि गांव का कोई शख्स शराब बेचते या खरीदते पाया गया तो उससे 51 हजार रुपए जुर्माना वसूला जाएगा। इसी कड़ी में गांव के 12 लोगों से बैठक के दिन 45 हजार रुपए वसूले गए हैं। ये लोग शराब बेचते पकड़े गए थे। बैठक में गांव में 10 दिन के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगाने का निर्णय किया गया है। जिससे लोगों पर निगरानी रखी जा सके। इन सब की निगरानी गांव की ग्राम समिति करेगी।


गाली देने पर 20 हजार का जुर्माना, डिस्पोजल बेचने पर प्रतिबंध: बैठक में गांव में गाली गलौज करने वालों से 20 हजार रुपए जुर्माना वसूलने का फैसला लिया गया है। साथ ही डिस्पोजल बेचने पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इस बैठक में हर वर्ग के लोगों को बुलाया गया था। बड़ी संख्या में महिलाएं भी शामिल हुई थीं। ऐसे लोगों को समझाइश दी गई है , जो इन तरह की अवैध गतिविधियों में शामिल थे।


महिलाओं को काफी दिक्कत हो रही थी: गांव के वरिष्ठ नागरिक प्रेम साहू ने बताया कि गांव में खुले रूप से अवैध शराब बिक्री के कारण हर वर्ग शराब की चपेट में है और विशेषकर महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। जिसके कारण मानवता खत्म होती जा रही है। ग्रामीणों की यह पहल काफी सार्थक है और आज की बैठक में सभी ने मिलजुल कर सहभागिता निभाई है।

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