मिशन क्लीन डेटा : फर्जी आधार कार्ड से खरीदे 35,000 सिम रद्द, देशभर में 135 करोड़ नंबरों की जांच, 35,000 sims bought with fake aadhar card canceled

canceled sim with fake aadhar card : मोबाइल नंबर और इंटरनेट से बढ़ते साइबर अपराध को रोकने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने देशभर के 135 करोड़ मोबाइल यूजर्स के नंबरों की जांच की है। छत्तीसगढ़ के 2.50 करोड़ नंबरों की जांच में चाैकाने वाला खुलासा यह हुआ कि यहां के 35 हजार से ज्यादा मोबाइल नंबर फर्जी आधार कार्ड से खरीद लिए गए थे।

भास्कर को मिली जानकारी के मुताबिक डीओटी की जांच में प्रदेश में 37,000 नंबर अप-टू-दी मार्क नहीं पाए गए हैं। यानी इनकी खरीदी में जो दस्तावेज इस्तेमाल किए गए, वे सही नहीं थे। इसीलिए पिछले 6 माह में 35,000 नंबर सस्पेंड करते हुए सिम कार्ड रद्द कर दिए गए हैं।

अर्थात अब ये नंबर स्थायी रूप से बंद हो गए। बचे हुए 2,000 नंबरों की जांच जारी है। इतना ही नहीं, डीओटी ने वरहॉफ (verhoff) सोफ्टवेयर विकसित किया है। इसके जरिए ही नंबर दिए जा रहे हैं। डीओटी का दावा है कि इसके जरिए फर्जीवाड़े की संभावना बहुत कम हो गई है। डीओटी अधिकारियों के मुताबिक बीएसएनएल और एक अन्य टेलीकॉम कंपनी के एक भी नंबर में गड़बड़ी नहीं मिली।


खबर भी नहीं, आपका नंबर हो रहा था इस्तेमाल
1. सिम आपके नाम पर मगर कोई और कर रहा उपयोग, क्योंकि फर्जी अधार से खरीदे गए।
2. मृत व्यक्ति के नाम का सिम बाद में भी बंद नहीं हुआ, क्योंकि नाम ट्रांसफर नहीं हुआ।
3. दूसरे राज्यों के सैकड़ों सिम छत्तीसगढ़ में एक्टिव मिले, जांच में इनके नाम-पते गलत।


सही सिम की पहचान वरहॉफ सॉफ्टवेयर से: डीओटी ने वरहॉफ (verhoff) सॉफ्टवेयर तैयार किया है। इसके जरिए सिम उपभोक्ता के आधार के 12 अंक में से 11 नंबर डालने पर अगर 12वां नंबर अपने आप जनरेट होता है, तो सिम सही व्यक्ति का है। अगर, नंबर स्वीकार नहीं होता है, तो ऐसे सिम को सस्पेक्टेड मानकर डिस-एक्टिवेट किया जा रहा है। कंपनियों को इस सत्यापन के बाद ही सिम बेचने के आदेश हैं। सभी को सॉफ्टवेयर दिया जा चुका है।


नौ से अधिक सिम भी मिले: नियमानुसार एक उपभोक्ता आधार कार्ड या अन्य किसी आईडी कार्ड से अधिकतम 9 सिम ही ले सकता है। जिन 2000 नंबरों की जांच जारी है, उनमें अधिकांश के पास 9 से अधिक सिम हैं। इन्होंने किस आधार पर सिम आवंटित करवाए, यह पता लगाया जा रहा है क्योंकि 9 से ऊपर के सिम भी रद्द होंगे।


अपराध रोकने डेटा क्लीन: अपराध रोकने के उद्देश्य से सिम वेरीफाई किए हैं। बड़ी संख्या में नंबर सस्पेंड हुए हैं। अब भी 2000 नंबरों की जांच जारी है। फर्जी सिम सिस्टम से बाहर कर दिए गए हैं, जिससे डेटा क्लीन हो गया
-एसके गढ़वाल, उप महानिदेशक, भारत दूरसंचार सेवा, छत्तीसगढ़

नंबर बंद होने से 4 करोड़ का नुकसान: दो निजी कंपनियों द्वारा बेचे गए नंबरों में सर्वाधिक लापरवाही पाई गई है। उधर, 35000 नंबर बंद होने से कंपनियों को सालाना करीब 4 करोड़ रुपए का नुकसान होने तय है।

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ